नई दिल्ली, 2 अप्रैल, 2026: इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA), संस्कृति मंत्रालय, नई दिल्ली, और डी वाई पाटिल इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी (DYPIU), पुणे के अंतर्गत सेंटर ऑफ एक्सीलेंस – इंडियन नॉलेज सिस्टम (सीओई–आईकेएस) के बीच आज आईजीएनसीए में आयोजित एक औपचारिक समारोह में समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए।
इस एमओयू (MoU) पर औपचारिक रूप से हस्ताक्षर डॉ. सच्चिदानंद जोशी, माननीय सदस्य सचिव, आईजीएनसीए, तथा प्रो. मनीष भल्ला, माननीय कुलपति, डीवाईपीआईयू द्वारा किए गए। इस अवसर पर प्रो. रमेश सी. गौड़, डीन, आईजीएनसीए, तथा प्रो. माधवी देशपांडे, डीन, फैकल्टी ऑफ नॉन- इंजीनियरिंग, डीवाईपीआईयू उपस्थित रहीं, जबकि प्रो. अवनीश सिंह चौहान, संस्थापक निदेशक, सीओई–आईकेएस, डीवाईपीआईयू ने समारोह में वर्चुअल माध्यम से भाग लिया।
समारोह में आईजीएनसीए के वरिष्ठ अधिकारी प्रत्यक्ष रूप से उपस्थित रहे, जबकि डीवाईपीआईयू के प्रतिनिधि एवं वरिष्ठ अधिकारी, जिनमें डॉ. बीरन मोइदीन बी. एम., रजिस्ट्रार; श्री विक्रम बरारा, परीक्षा नियंत्रक; तथा डॉ. माणिक राजोपाध्ये शामिल हैं, वर्चुअल माध्यम से कार्यक्रम में सम्मिलित हुए।
यह एमओयू सहयोगात्मक अनुसंधान, शैक्षणिक आदान-प्रदान, तथा भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण, संवर्धन और प्रसार को बढ़ावा देने का उद्देश्य रखता है। इसके अंतर्गत भारतीय कला, संस्कृति और पारंपरिक ज्ञान के क्षेत्रों में अंतर्विषयक अध्ययन, प्रलेखन और क्षमता निर्माण हेतु संयुक्त पहल की परिकल्पना की गई है।
यह सहयोग भारतीय ज्ञान परंपरा में शैक्षणिक साझेदारी को सुदृढ़ करने तथा अंतर्विषयक सहभागिता को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो भारत की समृद्ध सांस्कृतिक और बौद्धिक विरासत के संरक्षण एवं प्रसार के प्रति साझा प्रतिबद्धता को और मजबूत करता है।
‘वंदे ब्रज वसुंधरा’ की सूक्ति को अपने जीवन में आत्मसात करने वाले द्विभाषी साहित्यकार डॉ. अवनीश सिंह चौहान (जन्म: 4 जून, 1979) आभासी दुनिया में हिंदी नवगीत के संस्थापकों में से एक हैं। वे वर्तमान में मास्टर ट्रेनर (नीतिशास्त्र एवं कथाकथन शिक्षण-पद्धति), भारतीय ज्ञान परंपरा–विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत कार्यरत हैं।






